देव पितृ निमंत्रण
मंडप में चुल्हा रखा जाता है, उस पर मटकी रखी जाती है मटकी पर मिट्टी की परई रख दी जाती है, निमत्रण देने के बाद ढंक दी जाती है, सिल, लोढा, सफेद कपडा बिछाकर सबसे पहले पुरोहित द्वारा (देवनका) देवों को, फिर पितरों को निमंत्रण देने के लिए बुलाते है परिवार के उपस्थित सदस्य कपडे में चांवल सींचते जाते है, दसमें कुटुबं की 3 पीढी से स्वर्गवासी लोगों को यादकर नाम लकर निमंत्रण देकर बुलाते है, अब कुछ लोंगो के विवाह में विध्न नही पहुँचाने की प्रार्थना हेतु निमंत्रण देते है कि वे लोग न आऍं सॉंप, बिच्छु, आंधी पानी आदि इन्हें भी परई में बंदकर देते है ।









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